क्या आपने ध्यान दिया है कि जैसे ही मौसम बदलता है, शरीर सबसे पहले रिएक्ट करता है?
सर्दी आते ही जुकाम, गर्मी में पेट खराब, बरसात में बुखार, शरद में एलर्जी—ये सब अचानक नहीं होता।
भारत में लगभग 40% बीमारियां मौसम परिवर्तन के दौरान बढ़ती हैं, और ये समस्या बच्चों और बुजुर्गों में और ज्यादा दिखती है।
असल में, हर मौसम शरीर पर अलग असर डालता है (Seasonal Impact on Body)—
सर्दी में कफ बढ़ता है
गर्मी में पित्त बढ़ता है
बरसात में वात बढ़ता है
और यही असंतुलन बीमारियों का कारण बनता है।
आयुर्वेद का समाधान – ऋतुचर्या (Ritucharya / Seasonal Regimen)
आयुर्वेद ने 5000 साल पहले ही बता दिया था कि प्रकृति जैसे बदलती है, वैसे ही शरीर की ज़रूरतें भी बदलती हैं।
इसी सिद्धांत को कहते हैं –
ऋतु (Season) + चर्या (Routine) = ऋतुचर्या
Meaning:
“मौसम के अनुसार अपना आहार-विहार बदलना” — यही प्राकृतिक स्वास्थ्य की कुंजी है।
Modern Context (आज के समय की चुनौतियां)
आज के समय में समस्या और बढ़ गई है:
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से मौसम अनियमित हो गए हैं
लोग पारंपरिक मौसमी आहार नहीं लेते
AC/Heater से शरीर का प्राकृतिक अनुकूलन कम हो गया है
फास्ट फूड, नींद की कमी, और तनाव से इम्यूनिटी कमजोर रहती है
इसीलिए आज ऋतुचर्या पहले से ज़्यादा ज़रूरी हो गई है।
भारत का मौसम: विविध और जटिल
भारत में:
उत्तर भारत में कठोर ठंड
दक्षिण भारत में सालभर गर्मी
तटीय क्षेत्रों में नमी
पहाड़ों में तेज ठंड और कम ऑक्सीजन
इसी वजह से एक ही मौसम हर क्षेत्र में अलग प्रभाव डालता है।
इस लेख में आपको क्या मिलेगा?
✔ 6 Ayurvedic ऋतुएं
✔ 4 Modern Seasons
✔ 12 महीने का Seasonal Chart
✔ हर मौसम का Diet + Lifestyle + Yoga
✔ Skin & Hair Care
✔ बच्चों व बुजुर्गों की Seasonal Care
✔ Regional Differences
✔ Seasonal Immunity Boosting
✔ Climate Change का प्रभाव
सब कुछ आसान भाषा में, भारतीय जीवनशैली के अनुसार और 100% प्रैक्टिकल।
ऋतुचर्या – आयुर्वेदिक मौसमी जीवन | Ritucharya – Ayurvedic Seasonal Living
ऋतुचर्या क्या है? | What is Ritucharya
ऋतुचर्या (Ritucharya) का मतलब है—
👉 “मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या, खानपान और आदतों को बदलना।”
आयुर्वेद मानता है कि जैसे-जैसे मौसम बदलता है,
शरीर के दोष (Doshas) बदलते हैं
पाचन अग्नि (Digestive Fire) बदलती है
ऊर्जा स्तर बदलता है
त्वचा, बाल और इम्यूनिटी भी प्रभावित होती है
अगर जीवनशैली भी समय के अनुसार बदल जाए तो:
✔ बीमारी नहीं होती
✔ इम्यूनिटी मजबूत रहती है
✔ ऊर्जा बनी रहती है
✔ उम्र बढ़ती है लेकिन बीमारी नहीं
अदानकाल और विसर्गकाल | Adana & Visarga Kala
आयुर्वेद वर्ष को दो बड़े मौसम समूहों में बाँटता है:
1. अदानकाल (Adana Kala – शरीर से शक्ति का क्षय होने वाला काल)
समय: जनवरी से जून
ऋतुएं: शिशिर → वसंत → ग्रीष्म
स्थिति:
सूर्य की गर्मी बढ़ती है
शरीर की ताकत घटती है
शरीर में रूक्षता (Dryness) बढ़ती है
पित्त और वात धीरे-धीरे बढ़ते हैं
इस समय शरीर सबसे संवेदनशील (Most Vulnerable) होता है।
2. विसर्गकाल (Visarga Kala – ऊर्जा देने वाला काल)
समय: जुलाई से दिसंबर
ऋतुएं: वर्षा → शरद → हेमंत
स्थिति:
चंद्रमा का प्रभाव बढ़ता है
शीतल, शांत वातावरण
शरीर को पोषण मिलता है
शक्ति बढ़ती है
कफ बढ़ता है, वात शांत होता है
इस समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सबसे मजबूत होती है।
6 आयुर्वेदिक ऋतुएं | 6 Ayurvedic Seasons
आयुर्वेद साल को 6 ऋतुओं में बाँटता है:
1. शिशिर (Shishira – Peak Winter) – मध्य जनवरी से मध्य मार्च
दोष: वात संचय + कफ बढ़ना
मौसम: सबसे ठंडा, शुष्क
केयर: गर्म, तैलीय, पोषक आहार
2. वसंत (Vasanta – Spring) – मध्य मार्च से मध्य मई
दोष: कफ प्रकोप
मौसम: सुखद, फूलों का मौसम
केयर: हल्का आहार, कफ कम करने वाली चीजें
3. ग्रीष्म (Grishma – Summer) – मध्य मई से मध्य जुलाई
दोष: पित्त संचय
मौसम: गर्म, सूखा
केयर: ठंडक देने वाला भोजन, हाइड्रेशन
4. वर्षा (Varsha – Monsoon) – मध्य जुलाई से मध्य सितंबर
दोष: वात प्रकोप
मौसम: नमी, संक्रमण
केयर: हल्का, गर्म, कम तैलीय भोजन
5. शरद (Sharad – Autumn) – मध्य सितंबर से मध्य नवंबर
दोष: पित्त प्रकोप
मौसम: बारिश के बाद की गर्माहट
केयर: पित्त शांत आहार, डिटॉक्स
6. हेमंत (Hemanta – Early Winter) – मध्य नवंबर से मध्य जनवरी
दोष: कफ संचय
मौसम: ठंडक लेकिन आरामदायक
केयर: तैलीय, पोषक आहार; ताकत बढ़ाने वाले व्यंजन
4 आधुनिक मौसम | 4 Modern Seasons
✔ सर्दी (Winter – November to February)
✔ गर्मी (Summer – March to June)
✔ बरसात (Monsoon – July to September)
✔ शरद/पोस्ट-मानसून (Autumn – October to November)
ये आधुनिक मौसम आयुर्वेदिक ऋतुओं के साथ जुड़ जाते हैं, और भारतीय जीवनशैली में सबसे ज्यादा प्रैक्टिकल भी हैं।
सर्दी का मौसम – स्वास्थ्य गाइड (नवंबर–फरवरी)
Winter Season – Health Guide (November–February)
सर्दी में शरीर पर असर | Winter’s Effect on Body
सर्दियों में शरीर कुछ खास बदलावों से गुजरता है:
1. पाचन अग्नि बढ़ती है (Digestive Fire Strong)
ठंड में शरीर खुद को गर्म रखने की कोशिश करता है
इसलिए भूख ज्यादा लगती है
पाचन शक्ति पूरे साल में सबसे मजबूत होती है
2. त्वचा शुष्क (Dry Skin)
रूखापन
होंठ, एड़ियां फटना
3. श्वसन तंत्र (Respiratory System)
कफ बढ़ता है
सर्दी-जुकाम आम
अस्थमा बिगड़ सकता है
4. जोड़ों में दर्द (Joint Issues)
आर्थराइटिस बढ़ता है
5. रक्तचाप (Blood Pressure)
BP थोड़ा बढ़ सकता है
हार्ट पेशेंट्स को विशेष ध्यान
सर्दी में आहार | Winter Diet
सर्दियों का नियम:
👉 जो पोषक है, गर्म है, तैलीय है – वह लाभदायक है।
अनाज (Grains)
बाजरा
गेहूं
मक्का
दालें
उड़द दाल
चना
राजमा
सब्जियां
गाजर
शकरकंद
चुकंदर
मूली
मेथी
पालक
फल
अमरूद
संतरा
सेब
अनार
खजूर
मेवे (Dry Fruits)
बादाम
अखरोट
काजू
किशमिश
रोजाना:
👉 5–7 बादाम + 2 खजूर + 4 अखरोट
मसाले (Spices)
अदरक
काली मिर्च
हल्दी
दालचीनी
लौंग
तेल/घी
तिल का तेल
घी (अधिक मात्रा में लाभकारी)
सर्दी में जीवनशैली | Winter Lifestyle
सुबह
गुनगुना पानी
तिल तेल की मालिश (Abhyanga)
गर्म पानी से स्नान
घर पर
धूप लें (Vitamin D)
गर्म कपड़े पहनें
शाम
हल्का व्यायाम
जल्दी डिनर (7–8 PM)
रात
जल्दी सोएं
कमरे को बहुत ठंडा न रखें
सर्दी में व्यायाम | Winter Exercise
सर्दियों में stamina सबसे अच्छा होता है।
✔ सूर्य नमस्कार
✔ दौड़ना / तेज चलना
✔ भस्त्रिका
✔ उज्जायी
✔ स्क्वैट्स
✔ वजन प्रशिक्षण
सर्दी में त्वचा और बाल देखभाल | Winter Skin & Hair Care
त्वचा के लिए
नहाने के बाद मॉइस्चराइज
बादाम/नारियल तेल
गर्म पानी से चेहरा न धोएं
बालों के लिए
गुनगुने तेल से मसाज
हफ्ते में 1–2 बार हेड बाथ
कंडीशनर अनिवार्य
सर्दी में बीमारियां | Winter Diseases
✔ सर्दी-जुकाम
✔ अस्थमा
✔ चेस्ट कंजेशन
✔ हार्ट अटैक का रिस्क
✔ स्किन ड्राईनेस
✔ जोड़ों का दर्द
रोकथाम:
गर्म रहें
इम्यूनिटी बूस्टर काढ़ा
अदरक-लहसुन बढ़ाएं
विटामिन C लें
गर्मी का मौसम – स्वास्थ्य गाइड (मार्च–जून)
Summer Season – Health Guide (March–June)
गर्मी भारत में सबसे चुनौतीपूर्ण मौसम माना जाता है, क्योंकि:
तापमान बहुत अधिक होता है
शरीर से पानी तेजी से निकलता है
पित्त दोष (Pitta Dosha) बढ़ता है
डिहाइड्रेशन (Dehydration) और हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) का खतरा बढ़ जाता है
गर्मी में शरीर पर असर | Summer’s Effect on Body
गर्मी में शरीर कुछ खास तरह से प्रतिक्रिया देता है:
1. पित्त संचय (Pitta Accumulation) – मुख्य समस्या
शरीर में गर्मी बढ़ती है
चिड़चिड़ापन, गुस्सा, पसीना, मुंह के छाले
पेट के रोग (Acidity, Loose Motion)
2. शरीर का पानी कम होना
पसीना ज्यादा निकलता है
मिनरल्स कम हो जाते हैं (Electrolyte imbalance)
चक्कर आना, कमजोरी
3. त्वचा पर असर
टैनिंग
रैशेज
सनबर्न
मुंहासे (Acne)
4. पाचन अग्नि कमजोर
गर्मी से भूख कम
भारी भोजन पचता नहीं
गर्मी में आहार | Summer Diet
गर्मी का आयुर्वेदिक नियम:
👉 शीतल (Cooling) + हल्का (Light) + पानी से भरपूर (Hydrating)
क्या खाएं (Best Foods):
फल (Cooling Fruits):
तरबूज (Watermelon)
खरबूजा (Muskmelon)
खीरा (Cucumber)
पपीता (Papaya)
नारियल पानी (Coconut Water)
बेल का शर्बत (Bael Juice)
नींबू पानी (Lemon Water)
अनार (Pomegranate)
सब्जियां (Vegetables):
लौकी (Bottle Gourd)
टिंडा
तोरई
परवल
कद्दू
खीरा
करेला (कम मात्रा)
दूध/दही
छाछ (Buttermilk) – सबसे महत्वपूर्ण
दही
गिलोय छाछ
ठंडाई (बिना चीनी)
शीतल अनाज (Cooling Grains):
जौ (Barley)
चावल (Rice)
गेहूं (हल्की मात्रा)
मसाले (Cooling Spices):
धनिया
सौंफ
पुदीना
इलायची
जीरा
पेय (Drinks):
नींबू-पानी
नारियल पानी
बेल का शरबत
आम पना
सौंफ पानी
जौ का पानी
छाछ
क्या न खाएं (Avoid):
तला भोजन
मसालेदार खाना
भूरा मांस (Heavy Non-veg)
मैदा, पिज़्ज़ा, बर्गर
Cold drinks (कृत्रिम चीनी+कैफीन)
दिन में गरम मसाले
दिन में दही (ठीक है), लेकिन रात में दही बिलकुल नहीं
गर्मी में जीवनशैली | Summer Lifestyle
1. दिनचर्या (Daily Routine):
🌞 सुबह:
हल्का व्यायाम
ठंडा/स्निग्ध जल
नारियल पानी
🌞 दोपहर:
बाहर धूप में कम जाएं
दोपहर 12–4 PM सबसे गर्म समय
🌙 रात:
हल्का भोजन
पुदीना पानी
ठंडी नींद का माहौल
2. सर्दी की तरह भारी व्यायाम न करें
गर्मी में heavy workout से शरीर और गर्म होता है
वात-पित्त दोनों बिगड़ते हैं
✔ हल्की वॉक
✔ स्विमिंग
✔ प्राणायाम
✔ योग (कूलिंग योग)
गर्मी में योग और प्राणायाम | Summer Exercise & Cooling Yoga
Cooling Yogasanas:
शीतली प्राणायाम (Sheetali)
शीतकारी प्राणायाम (Sheetkari)
चंद्र भेदन प्राणायाम
सर्वांगासन
पश्चिमोत्तानासन
ताड़ासन
Avoid in Summer:
भस्त्रिका
कपालभाति
सूर्य नमस्कार की अधिक मात्रा
गर्मी में त्वचा व बालों की देखभाल | Summer Skin & Hair Care
त्वचा समस्याएं:
टैनिंग
पसीने से खुजली
fungal infections
acne
उपाय:
✔ गुलाब जल
✔ एलोवेरा जेल
✔ Multani Mitti
✔ खीरा फेस पैक
✔ Coconut-based moisturizers
बाल:
हफ्ते में 1–2 बार शैम्पू
सिर पर सीधे धूप न पड़े
एलोवेरा जेल scalp पर beneficial
गर्मी की आम बीमारियां | Common Summer Diseases
✔ Heat Stroke (लू लगना)
✔ Dehydration
✔ Acidity
✔ Mouth Ulcers
✔ Rashes
✔ Typhoid
✔ Jaundice (पीलिया)
✔ Diarrhea, Loose Motion
रोकथाम:
बाहर निकले तो पानी साथ रखें
ORS/ग्लूकोज़
धूप में सिर ढकें
छाछ पिएं
बरसात का मौसम – स्वास्थ्य गाइड (जुलाई–सितंबर)
Monsoon Season – Health Guide (July–September)
बरसात सबसे रोगों वाला मौसम माना जाता है, क्योंकि:
Vata Dosha बढ़ता है
Infection तेजी से फैलते हैं
Mosquito-borne diseases बढ़ती हैं
पाचन सबसे कमजोर पड़ता है
बरसात में शरीर पर असर | Monsoon’s Effect
1. वात प्रकोप बढ़ता है
गैस, bloating
जोड़ों का दर्द
constipation
2. Immunity कम हो जाती है
ठंड-खांसी बढ़ती है
वायरल बुखार
3. सबसे बड़ा खतरा: Waterborne Diseases
डेंगू
मलेरिया
चिकनगुनिया
टाइफाइड
हैजा (Cholera)
बरसात में आहार | Monsoon Diet
इस मौसम का नियम:
👉 गर्म, ताजा, हल्का भोजन।
👉 तैलीय और भारी भोजन कम।
क्या खाएं:
मूंग दाल
खिचड़ी
उबला पानी
अदरक
काली मिर्च
हल्दी
तुलसी
नींबू (कम मात्रा)
सूप
गर्म दूध
सब्जियां:
लौकी
परवल
टिंडा
मेथी
करेले की सब्जी
फल:
सेब
अनार
पपीता
केला
Avoid:
कच्चा सलाद
roadside food
समुद्री भोजन (सीफूड)
दही + छाछ (अत्यधिक नमी का मौसम)
तरबूज, खरबूजा (अधिक ठंडक नुकसानदेह)
बरसात में जीवनशैली | Monsoon Lifestyle
✔ क्या करें
उबला पानी पिएं
घर में नमी न रहने दें
मच्छरदानी
कफ वाली चीजें कम
पैरों को सूखा रखें
प्रतिदिन काढ़ा (हल्का)
रोज अदरक-तुलसी वाली चाय
क्या न करें
भीगने के बाद देर तक गीले कपड़ों में न रहें
AC + पंखा एक साथ न चलाएं
डेंगू के समय पपीते की पत्ती खाने की अफवाहों पर भरोसा न करें—डॉक्टर से सलाह लें
बरसात की आम बीमारियां | Common Monsoon Diseases
✔ डेंगू
✔ मलेरिया
✔ चिल्ड्रन वायरल फीवर
✔ साइनस
✔ टाइफाइड
✔ फ्लू
✔ Skin Fungal infections
Prevention:
हाथ धोना
उबला पानी
मच्छरों से बचाव
Immunity boosting herbs:
तुलसी
अदरक
दालचीनी
अश्वगंधा (दैनिक नहीं, जरूरत अनुसार)
शरद का मौसम – स्वास्थ्य गाइड (अक्टूबर–नवंबर)
Autumn Season – Health Guide (October–November)
यह मौसम पित्त प्रकोप (Pitta Aggravation) का समय है।
बारिश के बाद गर्माहट बढ़ती है और शरीर में heat जमा हो जाती है।
शरद में शरीर पर असर | Autumn’s Effect
मुंह के छाले
acidity
skin dryness
allergies
viral fever
loose motion
नाक-कान-गला infections
शरद में आहार | Autumn Diet
👉 Pitta Shamak Diet (Cooling Diet)
✔ फल
सेब
नाशपाती
अनार
पपीता
नारियल पानी
✔ सब्जियां
लौकी
टिंडा
कद्दू
खीरा
पुदीना
धनिया
✔ मसाले
धनिया
सौंफ
जीरा
छोटी इलायची
❌ Avoid
तीखा
गरम मसाले
भुजिया
चिप्स
रोडसाइड खाना
तला भोजन
शरद में जीवनशैली | Autumn Lifestyle
✔ सूर्योदय से पहले जागें
✔ पित्त शांत करने वाले योग करें
✔ सुबह-शाम हल्का व्यायाम
✔ नारियल पानी + सौंफ पानी
✔ ज्यादा धूप से बचें
शरद में योग | Autumn Yoga
Sheetali pranayama
Chandra Bhedana
Vajrasana
Balasana
Viparit karni
बच्चों की मौसमी देखभाल | Children’s Seasonal Care
बच्चों की immunity वयस्कों से अलग होती है—
इसलिए ऋतुचर्या का पालन बच्चों में बहुत जल्दी असर दिखाता है।
शिशु (0–2 साल) | Infants (0–2 Years)
✔ बहुत ठंडा/बहुत गर्म न रखें
✔ कपड़े मौसम अनुसार
✔ कमरे में नमी न हो
✔ हल्का मालिश तेल: नारियल/तिल
✔ सर्दी में गर्म सरसों तेल
✔ गुनगुना पानी
✔ स्तनपान सबसे बड़ा Immunity Booster
बच्चे (2–12 साल) | Children (2–12 Years)
✔ जंक फूड कम
✔ seasonal fruits
✔ हल्का व्यायाम
✔ बरसात में infection control
✔ सर्दियों में warm oil massage
✔ गर्मी में ORS + नारियल पानी
✔ रात देर तक न जगाना
बुजुर्गों की मौसमी देखभाल | Elderly Seasonal Care
बुजुर्गों में वात दोष स्वाभाविक रूप से बढ़ा होता है।
सर्दी:
जोड़ों का दर्द बढ़ता है
गर्म कपड़े, तेल मालिश, calcium intake
गर्मी:
Dehydration risk
नारियल पानी, ORS, हल्का भोजन
बरसात:
Infection risk सबसे ज्यादा
boiled water, hygiene
शरद:
acidity + allergies
light diet
क्षेत्रीय अंतर – भारत के विभिन्न हिस्से
Regional Differences – Different Parts of India
उत्तर भारत (North India)
गर्मी बहुत ज्यादा
सर्दी बहुत कठोर
Pollution में बढ़त → श्वसन रोग
✔ सर्दियों में तिल तेल मालिश
✔ गर्मियों में ORS + छाछ
दक्षिण भारत (South India)
सालभर गर्म + नमी
✔ कूलिंग आहार
✔ दही-छाछ
✔ नारियल पानी
तटीय क्षेत्र (Coastal Regions)
Humidity + fungal infection
✔ नारियल तेल
✔ हल्का भोजन
✔ sweaty clothes जल्द बदलें
पहाड़ी क्षेत्र (Hilly Regions)
तेज ठंड + कम ऑक्सीजन
✔ high protein food
✔ nuts + घी
✔ तेल मालिश
महीने–दर–महीने चार्ट | Month-by-Month Chart
| महीना | मौसम | प्रमुख सलाह |
|---|---|---|
| जनवरी | शिशिर | गर्म भोजन, तिल तेल मालिश |
| फरवरी | शिशिर | कफ नियंत्रण |
| मार्च | वसंत | Detox, कफ कम |
| अप्रैल | वसंत | हल्का भोजन |
| मई | ग्रीष्म | पानी+ORS |
| जून | ग्रीष्म | फलों का सेवन |
| जुलाई | वर्षा | Infection Control |
| अगस्त | वर्षा | उबला पानी |
| सितंबर | शरद | Pitta-control |
| अक्टूबर | शरद | हल्की ठंड |
| नवंबर | हेमंत | ताकत बढ़ाने वाला भोजन |
| दिसंबर | हेमंत | Dryness care |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | FAQs
क्या हर मौसम में diet बदलना जरूरी है?
✔ हाँ, वरना दोष बढ़ेंगे और बीमारी होगी।क्या बच्चे भी ऋतुचर्या का पालन कर सकते हैं?
✔ हाँ, लेकिन हल्के रूप में।गर्मी में कौन सा पानी सबसे अच्छा?
✔ ORS + नारियल पानी।बरसात में क्या बिल्कुल avoid करें?
✔ कच्चा सलाद, street food, sea food।सर्दी में सबसे जरूरी आदत?
✔ Warm oil massage।
निष्कर्ष | Conclusion
प्रकृति हर मौसम में बदलती है, इसलिए हमारा जीवन भी बदलना चाहिए।
ऋतुचर्या का पालन करने से—
✔ इम्यूनिटी मजबूत रहती है
✔ बीमारियां कम होती हैं
✔ शरीर–मन दोनों संतुलित रहते हैं
✔ उम्र लंबी और स्वस्थ होती है
सीधा संदेश:
👉 “जो प्रकृति के साथ चलेगा, वही सबसे स्वस्थ रहेगा।”



