क्या आपको भी रोज सुबह पेट साफ (Clear Bowels) नहीं होता? मल त्याग (Bowel Movement) के समय बहुत जोर (Straining) लगाना पड़ता है? या दिन भर पेट भारी-भारी (Heaviness in Abdomen) और गैस-गैस सा महसूस होता रहता है? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं।
कब्ज (Constipation) एक बेहद आम लेकिन बहुत परेशान करने वाली समस्या है। रिसर्च के अनुसार, भारत में काफी लोग क्रॉनिक कब्ज (Chronic Constipation – लंबे समय तक रहने वाली कब्ज) से जूझते हैं, और शहरी क्षेत्रों में ये प्रतिशत और भी ज़्यादा होता है। लोग ऑफिस, हॉस्टल, पीजी, जिम, डाइटिंग या अनियमित लाइफस्टाइल की वजह से रोज-रोज पेट की समस्या झेलते हैं।
सबसे बड़ी बात – ज्यादातर लोग इसके बारे में खुलकर बात ही नहीं करते। शर्म, झिझक, या “अरे ये तो छोटी-मोटी बात है” सोचकर वो सालों तक इसको इग्नोर करते रहते हैं। लेकिन कब्ज सिर्फ “पेट साफ न होना” नहीं है – यह कई और बीमारियों की जमीन तैयार कर सकती है, जैसे:
बवासीर (Piles/Hemorrhoids – गुदा की नसों में सूजन)
फिशर (Anal Fissure – गुदा में दरार, चीरा)
पेट फूलना (Bloating), भारीपन, गैस
सिरदर्द (Headache), थकान (Fatigue), ध्यान न लगना
मुंह में बदबू (Bad Breath) और छाले (Mouth Ulcers)
त्वचा की समस्याएं (Skin Problems) – मुंहासे (Acne) बढ़ना
मूड स्विंग (Mood Changes), चिड़चिड़ापन (Irritability), नींद खराब
मैं खुद, एक आयुर्वेदिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट होने के साथ-साथ, कब्ज का मरीज रह चुका हूँ ।
कॉलेज के दिनों में हॉस्टल का अनियमित खाना, कम पानी, रात-रात जागना – सबने मिलकर मुझे क्रॉनिक कब्ज दे दी। कई महीनों तक सुबह-सुबह टॉयलेट में बैठना एक स्ट्रगल था। लेकिन जब मैंने आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से अपनी दिनचर्या, आहार और कुछ सरल औषधियों को अपनाया, तो धीरे-धीरे न सिर्फ कब्ज, बल्कि गैस, सिरदर्द और स्किन प्रॉब्लम्स भी कम हो गईं।
यही अनुभव मैं अपने हर मरीज के साथ शेयर करता हूँ – और आज इस लेख के माध्यम से आपके साथ भी।
इस लेख में आप जानेंगे 15 ऐसे आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खे, जो:
तुरंत राहत (Instant Relief) भी दे सकते हैं
और सही तरीके से अपनाने पर स्थायी समाधान (Permanent Solution) भी देते हैं
सभी नुस्खे प्राकृतिक (Natural), सुरक्षित (Safe) और ज्यादातर आपके किचन में उपलब्ध चीज़ों से बने हैं
इनका उद्देश्य है आंतों (Intestines) की नैचुरल मूवमेंट (Peristalsis) को वापस सामान्य करना, न कि सिर्फ एक-दो दिन के लिए पेट साफ करना
इस लेख में आपको क्या मिलेगा | What You Will Learn in This Article
कब्ज क्या है – परिभाषा और लक्षण (Understanding Constipation – Definition & Symptoms)
कब्ज के कारण – आयुर्वेदिक और आधुनिक दोनों दृष्टिकोण से (Causes – Ayurvedic & Modern)
कब्ज के प्रकार – साधारण, क्रॉनिक, फंक्शनल (Types of Constipation)
15 प्रभावी आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खे – तुरंत राहत + लंबे समय का समाधान (15 Effective Remedies)
आहार योजना (Diet Plan) – क्या खाएं, क्या न खाएं
व्यायाम और योग (Exercise & Yoga) – कौन से आसान आसन कब्ज में मदद करते हैं
जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) – सुबह की रूटीन, पानी, टॉयलेट हैबिट्स
रोकथाम के उपाय (Prevention Tips) – ताकि कब्ज वापस न आए
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है – रेड फ्लैग्स (Red Flags)
महत्वपूर्ण नोट:
कब्ज का इलाज धैर्य (Patience) मांगता है। कुछ नुस्खे 1–2 दिन में असर दिखा देंगे, लेकिन अगर आपको कई महीनों से कब्ज है, तो आहार, नींद, पानी, तनाव और गतिविधि – इन सबको मिलकर ठीक करना पड़ेगा। यही आयुर्वेदिक दृष्टिकोण है – सिर्फ पेट ही नहीं, पूरी लाइफस्टाइल को बैलेंस करना।
कब्ज को समझें – परिभाषा और लक्षण
Understanding Constipation – Definition and Symptoms
कब्ज क्या है | What is Constipation
आम भाषा में लोग कहते हैं – “आज पेट साफ नहीं हुआ”, “आज कब्ज है”। लेकिन मेडिकल और आयुर्वेदिक दृष्टि से कब्ज (Constipation) का मतलब सिर्फ 1 दिन मल न आना नहीं है।
चिकित्सीय परिभाषा (Medical Definition):
कब्ज वह स्थिति है जिसमें:
मल त्याग (Bowel Movement) कठिन हो
मल सख्त (Hard Stool) और सूखा (Dry) हो
मल त्याग की फ्रीक्वेंसी कम हो – यानी हफ्ते में 3 बार से कम
मल त्याग के बाद भी ऐसा लगे कि पेट पूरा साफ नहीं हुआ (Incomplete Evacuation)
सामान्य बनाम असामान्य (Normal vs Abnormal):
हर व्यक्ति के शरीर की अपनी रूटीन होती है, लेकिन सामान्य रूप से:
दिन में 1–2 बार मल त्याग – आदर्श (Ideal) माना जाता है
कुछ लोगों में हर 1–2 दिन में 1 बार भी सामान्य हो सकता है, अगर:
मल नरम हो (Soft Stool)
बिना जोर लगाए आसानी से निकल जाए (Without Excessive Straining)
पेट हल्का और साफ महसूस हो
जब ये चीजें बदलने लगें –
मल की फ्रीक्वेंसी कम हो जाए
मल सख्त हो जाए
हर बार जोर लगाना पड़े
टॉयलेट से निकलकर भी लगे “थोड़ा और रुकता तो और निकलता” – तो इसे कब्ज की शुरुआत मान सकते हैं।
ब्रिस्टल स्टूल चार्ट | Bristol Stool Chart
डॉक्टर्स अक्सर Bristol Stool Chart का उपयोग करते हैं यह समझने के लिए कि आपका मल (Stool) किस कैटेगरी में आता है। इससे पता चलता है कि आपको कब्ज है, नॉर्मल है या दस्त (Diarrhea)।
| टाइप | विवरण (Description) | स्थिति (Status) |
|---|---|---|
| टाइप 1 | अलग-अलग सख्त गोलियां, जैसे बकरियों का मल (Separate Hard Lumps) | 🔴 गंभीर कब्ज (Severe Constipation) |
| टाइप 2 | गांठदार सॉसेज जैसा, कई लम्प्स जुड़े हुए (Lumpy Sausage) | 🟠 हल्की से मध्यम कब्ज (Mild–Moderate Constipation) |
| टाइप 3 | सॉसेज जैसा, लेकिन सतह पर हल्की दरारें (Sausage with Cracks) | 🟡 सामान्य सीमा (Normal Range) |
| टाइप 4 | चिकना, सॉफ्ट सॉसेज या साँप जैसा (Smooth, Soft Sausage/Snake) | 🟢 आदर्श (Ideal Stool) |
| टाइप 5 | मुलायम गोलियाँ, स्पष्ट किनारों के साथ (Soft Blobs with Clear Edges) | 🟢 नॉर्मल, थोड़ा ढीला (Normal–Loose) |
| टाइप 6 | फूली हुई, रैग्ड किनारों वाली ढीली स्टूल (Fluffy Pieces) | 🟡 हल्का दस्त (Mild Diarrhea) |
| टाइप 7 | पूरी तरह तरल, बिना किसी ठोस भाग के (Completely Liquid) | 🔴 दस्त (Diarrhea) |
लक्ष्य (Target):
हमारा लक्ष्य है कि आपका मल टाइप 3–4 के आसपास रहे – यानी न बहुत सख्त, न बहुत ढीला।
अगर आप रोज़ या अक्सर टाइप 1 या 2 लेते हैं, तो यह साफ संकेत है कि आपको कब्ज है और आहार, पानी, फाइबर, और लाइफस्टाइल पर काम करना ज़रूरी है।
कब्ज के लक्षण विस्तार से | Detailed Symptoms
कब्ज के लक्षण सिर्फ “कम बार मल आना” तक सीमित नहीं हैं। कई बार लोग थकान या सिरदर्द को भी कब्ज से नहीं जोड़ते, जबकि वे जुड़े हो सकते हैं।
1. मल त्याग से जुड़े लक्षण (Bowel-related Symptoms)
हफ्ते में 3 बार से कम मल त्याग (Less than 3 Bowel Movements/Week)
मल त्याग के लिए 10–15 मिनट तक टॉयलेट में बैठना
हर बार बहुत जोर लगाना (Excessive Straining)
मल सख्त, सूखा, छोटी गोलियों जैसा (Hard, Dry, Pellet-like Stool)
मल त्याग के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न लगना (Feeling of Incomplete Evacuation)
गुदा में रुकावट जैसा एहसास (Sensation of Blockage in Rectum)
2. पेट से जुड़े लक्षण (Abdominal Symptoms)
पेट फूलना (Bloating)
पेट भारी और कड़ा लगना (Heaviness and Hard Abdomen)
पेट में ऐंठन या दर्द (Cramping or Pain)
गैस बनना, डकार या बदबूदार गैस (Excess Gas, Belching, Flatulence)
3. अन्य लक्षण (Other Associated Symptoms)
लंबे समय तक रहने वाली कब्ज (Chronic Constipation) के साथ कई और लक्षण भी दिख सकते हैं:
भूख कम लगना (Loss of Appetite)
मुंह में बदबू (Halitosis/Bad Breath)
जीभ पर सफेद परत (White Coating on Tongue – आम/Ama का संकेत)
सिरदर्द (Headache)
जल्दी थक जाना (Fatigue)
त्वचा पर मुंहासे, रैश, या डलनेस (Acne/ Dull Skin)
चिड़चिड़ापन, मूड खराब, ध्यान न लगना (Irritability, Poor Concentration)
नींद खराब होना (Sleep Disturbance)
अगर आपको ऊपर दिए गए कई लक्षण एक साथ दिखते हैं, तो इसे हल्के में न लें। यह सिर्फ “कल से पेट खराब है” वाला मामला नहीं, बल्कि क्रॉनिक कब्ज की ओर इशारा हो सकता है।
कब्ज के प्रकार | Types of Constipation
हर व्यक्ति की कब्ज एक जैसी नहीं होती। किसी को अचानक कुछ दिनों के लिए समस्या होती है, तो किसी को सालों से। सही इलाज के लिए यह समझना ज़रूरी है कि आपकी कब्ज किस तरह की है।
एक्यूट कब्ज (Acute Constipation – अस्थायी कब्ज)
अचानक शुरू होती है
आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर 2–3 हफ्तों तक रहती है
कारण: यात्रा (Travel), पानी कम पीना, अचानक डाइट बदलना, शादी-पार्टी का भारी खाना, नई दवा शुरू होना
सही देखभाल से जल्दी ठीक हो जाती है
क्रॉनिक कब्ज (Chronic Constipation – दीर्घकालिक)
3 महीने या उससे ज़्यादा समय से नियमित समस्या
हफ्तों-महीनों से पेट साफ न होने की शिकायत
अक्सर लाइफस्टाइल, आहार, कम पानी, कम फाइबर, तनाव या किसी अंदरूनी बीमारी से जुड़ी होती है
सिर्फ 1–2 दिन के नुस्खे से नहीं, बल्कि व्यवस्थित इलाज और लाइफस्टाइल बदलाव से ठीक होती है
फंक्शनल कब्ज (Functional Constipation)
जाँच (जैसे कोलोनोस्कोपी, ब्लड टेस्ट आदि) में कोई बड़ी संरचनात्मक बीमारी नहीं मिलती
लेकिन आंतों की गति (Colonic Transit) धीमी होती है या पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां ठीक से रिलैक्स नहीं करतीं
इसमें जीवनशैली, नियमित टाइम, योग, बायोफीडबैक, और आयुर्वेदिक औषधियाँ बहुत मददगार रहती हैं
ऑर्गेनिक कब्ज (Organic Constipation)
कोई भौतिक/स्ट्रक्चरल कारण होता है – जैसे ट्यूमर (Tumor), स्ट्रिक्चर (Stricture), गंभीर इन्फ्लेमेशन आदि
इसमें सिर्फ घरेलू नुस्खे काफी नहीं, तुरंत डॉक्टर की ज़रूरत होती है
रेड फ्लैग संकेत – मल में खून, अचानक वजन घटना, उम्र >50 और नई कब्ज, एनीमिया, रात में भी दर्द
याद रखें:
अगर कब्ज नई है, अचानक शुरू हुई है और साथ में खून, वजन घटना या तेज दर्द है – तो पहले डॉक्टर से मिलें, बाद में नुस्खे।
कब्ज के कारण – आयुर्वेदिक और आधुनिक दृष्टि से
Causes of Constipation – Ayurvedic & Modern Perspective
कब्ज को समझने के लिए हमें दो नजरिए देखने होंगे –
आयुर्वेद (Ayurveda) – दोष, अग्नि, आम
आधुनिक चिकित्सा (Modern Medicine) – फाइबर, पानी, दवाएं, बीमारियां
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण (Ayurvedic Perspective)
आयुर्वेद के अनुसार कब्ज मुख्य रूप से वात दोष (Vata Dosha) के बढ़ने से होता है।
वात दोष के गुण (Qualities of Vata):
शुष्क (Dry)
ठंडा (Cold)
हल्का (Light)
रूक्ष (Rough)
जब ये गुण शरीर में ज़्यादा बढ़ जाते हैं, तो:
आंतों के भीतर शुष्कता (Dryness) बढ़ती है → मल सूखकर सख्त हो जाता है
रूक्षता (Roughness) → मल आगे बढ़ने में रुकावट, घर्षण
ठंडक (Coldness) → आंतों की गति (Peristalsis) धीमी हो जाती है
कुछ प्रमुख आयुर्वेदिक कारण:
अग्नि मांद्य (Weak Digestive Fire):
पाचन शक्ति (Agni) कमजोर हो
भोजन पूरी तरह न पचे → अपचित अन्न आम (Ama – टॉक्सिन जैसा पदार्थ) बनाता है
यह आम आंतों में जमा होकर रुकावट और heaviness देता है
विरुद्ध आहार (Incompatible Food Combinations):
दूध + नमक
दूध + खट्टे फल (Milk + Citrus)
दही + फल
गर्म + ठंडा साथ-साथ
ये संयोजन पाचन को बिगाड़कर आम बनाते हैं, जिससे बाद में कब्ज, गैस, एसिडिटी सब हो सकते हैं।
अप्राकृतिक आदतें (Unnatural Habits):
वेग धारण (Suppressing Natural Urge) – मल त्याग की इच्छा होने पर भी रोकना
जल्दी-जल्दी उठकर भागना, मोबाइल पर बैठे रहना, टॉयलेट में स्ट्रेस लेना
रात देर तक जागना, सुबह देर तक सोना – नैचुरल वेग का समय मिस हो जाना
मानसिक कारण (Mental Factors):
लगातार तनाव (Chronic Stress)
चिंता (Anxiety)
गुस्सा, निराशा, दुख
मानसिक स्थिति सीधे आंतों की गति को प्रभावित करती है – इसे आजकल “Gut-Brain Axis” भी कहा जाता है।
आधुनिक कारण (Modern Causes – Simple View Here in Part 1)
आधुनिक दृष्टि से:
फाइबर की कमी (Low Fiber Diet) – कम फल, कम सलाद, ज्यादा मैदा, जंक फूड
पानी कम पीना (Dehydration) – दिन भर चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक, पर सादा पानी कम
बैठे-बैठे काम (Sedentary Lifestyle) – ऑफिस जॉब, दिन भर स्क्रीन के सामने
दवाओं के दुष्प्रभाव (Side Effects of Medicines) – कुछ दर्द निवारक, एंटासिड, आयरन, एंटी-डिप्रेसेंट आदि
हार्मोनल और मेडिकल बीमारियां – थायरॉइड (Hypothyroidism), डायबिटीज, IBS आदि
इन सब कारणों को हम आगे के पार्ट्स में और विस्तार से लेंगे, ताकि आप यह समझ सकें कि आपकी कब्ज किस वजह से है – और उसी के अनुसार उपचार चुन सकें।
15 आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खे कब्ज के लिए
15 Ayurvedic Home Remedies for Constipation
यह सेक्शन आपके लिए सबसे ज़्यादा काम का है — क्योंकि इसमें मैं 15 ऐसे नुस्खे दे रहा हूँ जो तुरंत राहत (Instant Relief) भी देते हैं और लंबे समय का इलाज (Long-term Cure) भी।
हर नुस्खे में दिया गया है:
किसके लिए सुरक्षित
कितना समय लगता है
कैसे इस्तेमाल करें
क्या सावधानी रखें
तुरंत राहत के लिए 5 नुस्खे
For Instant Relief (5 Remedies)
1. त्रिफला चूर्ण – कब्ज का सबसे असरदार इलाज
Triphala Churna – Most Effective Remedy
त्रिफला कब्ज के लिए आयुर्वेद की नंबर 1 औषधि मानी जाती है।
क्यों असरदार?
आंतों की गति (Peristalsis) बढ़ाता है
मल को नरम करता है
अग्नि (Digestive Fire) को बढ़ाता है
आंतों की सफाई करता है
कैसे लें?
विधि 1 – रात को सोने से पहले:
1 चम्मच त्रिफला
1 गिलास गुनगुना पानी
पीने के 6–8 घंटे बाद सुबह पेट साफ
विधि 2 – दूध के साथ (वात शांत):
1 चम्मच त्रिफला
1 गिलास गर्म दूध
खुराक (Dosage):
Adults: 1 tsp
बच्चों के लिए: 1/4–½ tsp
Pregnant: केवल डॉक्टर की सलाह पर
कितने समय में असर?
⏱️ सुबह तक पूरा असर — 1 रात में ही
2. इसबगोल की भूसी – फाइबर पावर
Isabgol/Psyllium Husk – Fiber Power
कब्ज, IBS, गैस — तीनों में काम करता है।
कैसे काम करता है?
पानी सोखकर जेल बनाता है
मल को नरम करता है
आंतों को लुब्रिकेट करता है
कैसे लें?
1 tbsp इसबगोल
1 गिलास गुनगुना पानी
तुरंत पी लें
ऊपर से 1 गिलास और पानी पिएँ
कितने समय में असर?
⏱️ 8–12 घंटे
सावधानियाँ
कम पानी = कब्ज और बढ़ सकती है
कभी भी सूखा मत लें
3. गुनगुना पानी + नींबू – मॉर्निंग क्लीनर
Warm Water + Lemon – Morning Colon Cleanser
उठते ही सबसे पहले गुनगुना पानी + नींबू शरीर की क्लीनिंग को एक्टिव कर देता है।
कैसे लें?
1 गिलास गुनगुना पानी
½ नींबू
थोड़ा सा शहद (Optional)
फायदे
आंतों की गति तेज करता है
कब्ज + गैस + पेट फूलना कम करता है
लीवर को डिटॉक्स करता है
असर का समय
⏱️ 30–60 मिनट
4. अलसी के बीज – ओमेगा-3 + फाइबर बूस्टर
Flaxseeds – Omega-3 + Fiber Booster
Alsi (Flaxseeds) कब्ज में बहुत असरदार हैं।
क्यों?
घुलनशील फाइबर
ओमेगा-3 फैटी एसिड
मल को नरम करके आसानी से निकालते हैं
कैसे लें?
Option 1
1 चम्मच भुनी अलसी
रात में 1 गिलास पानी के साथ
Option 2
दही में 1 चम्मच अलसी मिलाकर
कितने समय में असर?
⏱️ 12–24 घंटे
Safe For:
Pregnancy ✔ (थोड़ी मात्रा में)
Children ✔ (½ tsp)
5. अंजीर – प्राकृतिक रेचक (Natural Laxative)
Figs – Natural Laxative
सूखे अंजीर (Dried Figs) में घुलनशील फाइबर बहुत होता है।
कैसे लें?
2–3 अंजीर
रातभर गर्म पानी में भिगो दें
सुबह खाली पेट खाएँ
ऊपर से वही भिगोया पानी पिएँ
कितने समय में असर?
⏱️ 24 घंटे में असर
⏱️ 2–3 दिनों में कब्ज पूरी तरह ठीक
Pregnancy Safe
Kids Safe (1 soaked fig)
पाचन सुधारने के लिए 5 नुस्खे
For Improving Digestion (5 Remedies)
6. अदरक + नींबू + शहद – पाचन अग्नि बूस्टर
Ginger + Lemon + Honey – Agni Enhancer
यह घरेलू मिश्रण अग्नि (Digestive Fire) को बढ़ाता है, जिससे खाना जल्दी पचता है और मल सामान्य बनता है।
कैसे लें?
1 गिलास गुनगुना पानी
½ नींबू
1 छोटा टुकड़ा कद्दूकस किया हुआ अदरक
1 चम्मच शहद
असर:
अग्नि मजबूत → भोजन अच्छी तरह पचे → कब्ज कम
गैस, भारीपन में राहत
Not for small kids
Pregnancy Safe (अदरक बहुत कम मात्रा में)
7. हींग पानी – गैस व कब्ज दोनों में असरदार
Hing Water – Works for Gas + Constipation
आयुर्वेद में हींग को Vata Reducer माना जाता है।
कैसे बनाएं?
1 गिलास गर्म पानी
1 चुटकी हींग
1 चुटकी काला नमक
कब लें?
खाना खाने के 30 मिनट बाद
किसके लिए उपयोगी?
जिनको कब्ज + गैस दोनों की समस्या हो
IBS patients
⏱️ 30–60 मिनट में आराम
8. जीरा पानी – आंतों की सफाई
Cumin Water – Cleanses Intestines
जीरा पानी digestion को तेज करता है, ऐंठन कम करता है और मल त्याग को नियमित करता है।
कैसे बनाएं?
1 चम्मच जीरा
1 गिलास पानी
उबालें
सुबह खाली पेट पिएँ
फायदे:
गैस कम
पेट में हल्कापन
आंतों की गर्मी बढ़ाता है (Agni improves)
9. अजवाइन पानी – पाचन रेगुलेटर
Ajwain – Digestive Regulator
अजवाइन (Carom Seeds) पाचन के लिए रामबाण है।
कैसे लें?
1 चम्मच अजवाइन
1 गिलास पानी में उबालें
छानकर पी लें
फायदे
इंडिजेशन
गैस
भारीपन
पाचन शक्ति बढ़ती है
10. सौंफ – मीठा पाचक
Fennel Seeds – Post-Meal Digestive
सौंफ पेट को शांत करती है और पाचन बेहतर बनाती है।
कैसे लें?
खाने के बाद 1 चम्मच सौंफ चबाएँ
या सौंफ की चाय (Fennel Tea) लें
किसके लिए उपयोगी?
बच्चे
बुजुर्ग
गर्भवती महिलाएं
लंबे समय तक कब्ज न लौटे इसके लिए 5 नुस्खे
Long-term Remedies (5 Remedies)
11. एलोवेरा जूस – नैचुरल क्लीनser
Aloe Vera Juice – Natural Intestinal Cleanser
एलोवेरा जूस आंतों को स्मूद बनाता है।
कैसे लें?
20–30 ml एलोवेरा जूस
1 गिलास पानी में
सुबह खाली पेट
किसके लिए:
Chronic Constipation
Skin Acne due to constipation
⏱️ असर – 3–5 दिन में
12. आंवला – विटामिन सी + पाचन शक्ति
Amla – Vitamin C + Digestive Strength
Amla strengthens digestion + removes toxins.
कैसे लें?
1 चम्मच आंवला पाउडर
गुनगुने पानी के साथ रात को
या
सुबह आंवला जूस
13. किशमिश भिगोकर – आयरन + फाइबर
Soaked Raisins – Iron + Fiber
बहुत हल्का लेकिन बेहद असरदार उपाय।
कैसे लें?
10–12 किशमिश
रातभर भिगो दें
सुबह खाएँ + पानी पिएँ
Pregnancy Safe ✔
Kids Safe ✔
14. छाछ – प्रोबायोटिक पावर
Buttermilk – Natural Probiotic
छाछ आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाती है।
कैसे लें?
दोपहर के खाने के बाद
1 गिलास छाछ
थोड़ा जीरा पाउडर + काला नमक
किसके लिए:
IBS
गैस
क्रॉनिक कब्ज
15. घी – आयुर्वेदिक लुब्रिकेंट
Ghee – Ayurvedic Lubricant
घी आंतों की सूखापन (Dryness) कम करता है।
कैसे लें?
Option 1
रात को 1 चम्मच घी
गर्म दूध में मिलाकर
Option 2
सुबह खाली पेट 1 tsp घी
Safe For:
kids
adults




